ख़ुशी हैसिर्फ़ अल्लाह की इताअत में
अल्लाह ने हमें सिर्फ़ उसी की इबादत के लिए पैदा किया है — मुकम्मल इताअत के साथ, हर तरह की बुतपरस्ती से आज़ाद होकर। यही इंसानियत के लिए अल्लाह का आख़िरी पैग़ाम है।
अल्लाह के नज़दीक सिर्फ़ इस्लाम (इताअत) ही सच्चा दीन है।— क़ुरआन 3 : 19
शुरू करने के तीन तरीक़े
आप जिस वजह से भी आए हों, वह सवाल चुनिए जो आपके सबसे क़रीब लगे।
इताअत क्या है?
पैग़ाम का एक छोटा तआरुफ़: इताअत, सिर्फ़ अल्लाह, और पाँच बुनियादी फ़र्ज़।
तआरुफ़ पढ़ें → 🤔क्या यह मेरे लिए है?
आप कोई भी हों, आपका स्वागत है। बिना किसी दबाव के एक सीधा जवाब।
पढ़ें → 🧮सुबूत ख़ुद जाँचिए
संख्या 19 की गणितीय निशानी ख़ुद परखिए। इन सीधी बातों के लिए किसी औज़ार की ज़रूरत नहीं।
अभी आज़माइए →अल्लाह ने हमें सिर्फ़ अपनी इबादत के लिए पैदा किया। इंसानियत के लिए उसका आख़िरी पैग़ाम क़ुरआन है। इताअत का मतलब है ख़ुद को सिर्फ़ अल्लाह के लिए समर्पित करना — न कोई साझीदार, न कोई बिचौलिया, न कोई बुत। यहाँ आप क़ुरआन मुफ़्त पढ़ सकते हैं, किताबें पढ़ सकते हैं और सुबूत ख़ुद परख सकते हैं।
अपने तरीक़े से पढ़िए
पढ़ना और डाउनलोड करना बिल्कुल मुफ़्त है।
पाँच मिनट में ख़ुद जाँचिए
क़ुरआन में 19 की संख्या पर आधारित एक गणितीय निशानी है। इन सीधी बातों को जाँचने के लिए किसी औज़ार की ज़रूरत नहीं:
- क़ुरआन में 114 सूरतें हैं, यानी 19 × 6।
- इसमें 6346 आयतें हैं, यानी 19 × 334।
- पहली आयत बिस्मिल्लाह में ठीक 19 अक्षर हैं।
पढ़िए और सीखिए
आख़िरी वसीयतनामे को पढ़ने, समझने और आगे पहुँचाने के लिए ज़रूरी सब कुछ।
हर मानने वाले के लिए औज़ार
हिसाब, नमाज़ के वक़्त और तालीम से जुड़ी चीज़ें।
रोज़ की आयतें और याद-दहानी
रोज़ की क़ुरआनी आयतें, गणित का करिश्मा और रूहानी याद-दहानी, इंशा'अल्लाह।
"ऐ मेरे रब, मेरा इल्म बढ़ा दे" — क़ुरआन 20:114