क्या यह मेरे लिए है?
नए, जिज्ञासु या असमंजस में पड़े हर इंसान के लिए एक सीधा जवाब। आप कोई भी हों, कृपया आगे पढ़ें।
यह किसके लिए है?
| अगर आप हैं... | तो... |
|---|---|
| किसी भी जमात का मुसलमान | यह पैग़ाम आपसे सिर्फ़ एक अल्लाह की इबादत करने को कहता है। कृपया इसे क़ुरआन से जाँच लें। |
| ईसाई या यहूदी | आपका स्वागत है। क़ुरआन आपसे इज़्ज़त के साथ बात करता है। |
| हिन्दू, बौद्ध या किसी और रास्ते के | आपका स्वागत है। पढ़िए, सवाल पूछिए और आज़ादी से फ़ैसला कीजिए। |
| बिना किसी धर्म के | आपका स्वागत है। सबूत देखिए और अपना फ़ैसला ख़ुद कीजिए। |
| शक या मुश्किल सवाल रखने वाले | अच्छी बात है। पूछिए। यह साइट आपको हर चीज़ जाँचने की दावत देती है। |
क्या कोई दबाव है?
नहीं।
यह साइट आपसे न किसी जमात में शामिल होने को कहती है, न पैसे देने को, न किसी चीज़ पर दस्तख़त करने को। अल्लाह फ़रमाता है:
“दीन के मामले में कोई ज़बरदस्ती नहीं है। बेशक सही रास्ता गलत रास्ते से जुदा हो चुका हैं। जिसने इनकार किया शैतान का और अल्लाह पर ईमान लाया तो उसने ऐसा मज़बूत सहारा थाम लिया जो कभी टूटनेवाला नहीं। और अल्लाह सब कुछ सुननेवाला और जाननेवाला है।”
क़ुरआन 2:256एक ही गुज़ारिश क्या है?
सिर्फ़ एक अल्लाह की इबादत कीजिए।
उसके साथ किसी को शरीक न कीजिए।
“कहो, 'ऐ किताबवालो! आओ उस एक बात की तरफ जो तुम में और हम में बराबर है कि हम एक अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करें और उसकी बन्दग़ी में किसी को शरीक न करें। और न परस्पर हममें से कोई एक-दूसरे को अल्लाह से हटकर रब बनाए। फिर अगर वह मुँह मोड़े (और कुबूल न करें) तो कह दो, गवाह रहो हम तो मुस्लिम हैं (खुदा के फ़रमाबरदार) ।”
क़ुरआन 3:64क्या सिर्फ़ “हमारे” लोग अच्छे हैं?
नहीं।
अल्लाह ईमान और नेक अमल को देखता है, लेबल को नहीं।
“यकीनन जो लोग ईमान रखते है और जो यहूदी हुए, और इसाई और जो मजहब बदल के तबदिल हो गए और जो कोई भी (१) ईमान लाए अल्लाह पर (२) और (ईमान लाए) कयामत के दिन पर (३) और नेक कर्म किये तो उनके रब के पास उन लोंगो को लिये बड़ा अज्र (इनाम) है. उन्हें न किसी का खौफ होगा और ना ही वह गमगीन होंगे।”
क़ुरआन 2:62يٰأَيُّهَا النّاسُ إِنّا خَلَقنٰكُم مِن ذَكَرٍ وَأُنثىٰ وَجَعَلنٰكُم شُعوبًا وَقَبائِلَ لِتَعارَفوا إِنَّ أَكرَمَكُم عِندَ اللَّهِ أَتقىٰكُم إِنَّ اللَّهَ عَليمٌ خَبيرٌ
इस आयत का हिन्दी अनुवाद तैयार हो रहा है। ऑनलाइन क़ुरआन में दूसरी ज़बानों में पढ़ सकते हैं।
क़ुरआन 49:13शुरुआत कहाँ से करें?
- तआरुफ़ पढ़िए।
- गणित का करिश्मा देखिए। संख्याएँ ख़ुद जाँचिए।
- ऑनलाइन क़ुरआन अपनी ज़बान में पढ़िए।