EkKhuda.org

परिचय — सिर्फ़ अल्लाह की इताअत क्या है?

सिर्फ़ अल्लाह की इताअत के पाक पैग़ाम में आपका स्वागत है — वह आलमी दीन, जो हर पुरानी हद से ऊपर है और इंसानियत को एक अल्लाह की इबादत में जोड़ता है।

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ

अल्लाह के नाम से, जो निहायत रहम करने वाला और मेहरबान है

1

तीन बुनियादें

🕌

इताअत (इस्लाम) क्या है?

इताअत (अरबी में "इस्लाम") वह दीन है जो अल्लाह ने अपनी सारी मख़लूक़ के लिए मुक़र्रर किया। यह कोई नया दीन नहीं है, बल्कि वही पैग़ाम है जो इतिहास में अल्लाह के सब रसूल लाए — इब्राहीम से मूसा तक, ईसा से मुहम्मद तक।

☝️

सिर्फ़ अल्लाह — لا إله إلا الله

इताअत की बुनियाद यह एलान है कि "अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं" — सिर्फ़ अल्लाह की इबादत, बिना किसी शरीक, बिचौलिये या सिफ़ारिशी के।

🔢

गणितीय चमत्कार

अल्लाह ने क़ुरआन के उसकी तरफ़ से होने का एक ज़बरदस्त भौतिक सबूत दिया है: संख्या 19 पर आधारित गणितीय कोड — ऐसे पैटर्न जो इंसानी हाथों से नहीं बन सकते थे।

और जानें →

إِنَّ الدّينَ عِندَ اللَّهِ الإِسلٰمُ وَمَا اختَلَفَ الَّذينَ أوتُوا الكِتٰبَ إِلّا مِن بَعدِ ما جاءَهُمُ العِلمُ بَغيًا بَينَهُم وَمَن يَكفُر بِـٔايٰتِ اللَّهِ فَإِنَّ اللَّهَ سَريعُ الحِسابِ

बेशक अल्लाह के नज़दीक जो दीन है वह इस्लाम है। और अहले किताब ने अपने पास इल्म आ जाने के बाद जो इख्तिलाफ किया वोह सिर्फ आपस की जिद, ईर्ष्या (और नफरत) की वजह से था। और जो लोग अल्लाह की आयातो (और हुक्मों) का इन्कार करें तो वह जान लें की अल्लाह बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है।

क़ुरआन 3:19
2

इबादत के पाँच फ़र्ज़

शहादा — ईमान का एलान

"अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं।"

شَهِدَ اللَّهُ أَنَّهُ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ وَالمَلٰئِكَةُ وَأُولُوا العِلمِ قائِمًا بِالقِسطِ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ العَزيزُ الحَكيمُ

और अल्लाह ने गवाही दी कि उसके सिवा कोई इबादत के लायक नहीं है और फरिश्तों और इल्म वालों ने भी यही गवाही दी के वही इन्साफ और संतुलन स्थापित करनेवाला है और उसके सिवा कोई इबादत के लायक नहीं है। और वह ज़बरदस्त प्रभुत्वशाली, हिकमत वाला है।

क़ुरआन 3:18
सलात — संपर्क नमाज़

अल्लाह से रिश्ता बनाए रखने के लिए दिन में पाँच बार संपर्क नमाज़।

وَأَقِمِ الصَّلوٰةَ طَرَفَىِ النَّهارِ وَزُلَفًا مِنَ الَّيلِ إِنَّ الحَسَنٰتِ يُذهِبنَ السَّيِّـٔاتِ ذٰلِكَ ذِكرىٰ لِلذّٰكِرينَ

दिन के दोनों हिस्सों में और रात की नमाज़ की पाबन्दी करो। बेशक नेक काम बुराई को मिटा देते हैं। यह उनके लिए नसीहत हैं जो नसीहत लेते हैं।

क़ुरआन 11:114
ज़कात — फ़र्ज़ दान

ज़रूरतमंदों की मदद से माल की पाकीज़गी।

وَأَقيمُوا الصَّلوٰةَ وَءاتُوا الزَّكوٰةَ وَاركَعوا مَعَ الرّٰكِعينَ

नमाज कायम करो और जकात अदा करते रहो और (नमाज में) झुकने वालों के साथ झुका करो।

क़ुरआन 2:43
सौम — रोज़ा

रूहानी पाकीज़गी के लिए रमज़ान के महीने में रोज़ा।

يٰأَيُّهَا الَّذينَ ءامَنوا كُتِبَ عَلَيكُمُ الصِّيامُ كَما كُتِبَ عَلَى الَّذينَ مِن قَبلِكُم لَعَلَّكُم تَتَّقونَ

ऐ ईमानवालो ! तुम पर इसी तरह रोजे यानि उपवास अनिवार्य किये गए हैं जैसे तुम से पहले लोगों पर अनिवार्य किये गए थे ताकि तुम परहेजगार बन जाओ।

क़ुरआन 2:183
हज — यात्रा

जो सामर्थ्य रखते हैं, उनके लिए ज़िंदगी में एक बार मक्का की यात्रा।

فيهِ ءايٰتٌ بَيِّنٰتٌ مَقامُ إِبرٰهيمَ وَمَن دَخَلَهُ كانَ ءامِنًا وَلِلَّهِ عَلَى النّاسِ حِجُّ البَيتِ مَنِ استَطاعَ إِلَيهِ سَبيلًا وَمَن كَفَرَ فَإِنَّ اللَّهَ غَنِىٌّ عَنِ العٰلَمينَ

उस में खुली हुई निशानियां हैं जैसे वह इबराहीम का स्थल है। और जिसने उसमें प्रवेश किया वह महफूज हो गया। और लोगों पर अल्लाह का हक़ है कि जिसको वहाँ तक पहुँचने की सामर्थ्य प्राप्त हो, वह इस घर का हज करे, और जिसने इनकार किया तो (इस इनकार से खुदा का कुछ नहीं बिगड़ता और) अल्लाह पूरी दुनिया के लोगो से बेनियाज़ (बेफिक्र) है।

क़ुरआन 3:97
3

इताअत में एकता

सच्चे इताअत करने वाले हर जगह हैं

हर दौर में और हर क़ौम में ऐसे लोग रहे हैं जिनके दिल सिर्फ़ अल्लाह के लिए समर्पित थे — चाहे उनका नाम कुछ भी रहा हो।

إِنَّ الَّذينَ ءامَنوا وَالَّذينَ هادوا وَالنَّصٰرىٰ وَالصّٰبِـٔينَ مَن ءامَنَ بِاللَّهِ وَاليَومِ الـٔاخِرِ وَعَمِلَ صٰلِحًا فَلَهُم أَجرُهُم عِندَ رَبِّهِم وَلا خَوفٌ عَلَيهِم وَلا هُم يَحزَنونَ

यकीनन जो लोग ईमान रखते है और जो यहूदी हुए, और इसाई और जो मजहब बदल के तबदिल हो गए और जो कोई भी (१) ईमान लाए अल्लाह पर (२) और (ईमान लाए) कयामत के दिन पर (३) और नेक कर्म किये तो उनके रब के पास उन लोंगो को लिये बड़ा अज्र (इनाम) है. उन्हें न किसी का खौफ होगा और ना ही वह गमगीन होंगे।

क़ुरआन 2:62

सारे नेक लोग एक हैं

सारे नेक लोग, अपने मज़हबी नामों से हटकर, अल्लाह की इताअत में एक हैं। आज जो बँटवारे दिखते हैं, वे इंसान के बनाए हैं और इंसानियत के लिए अल्लाह की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ हैं।

4

आख़िरी पैग़ाम

اليَومَ أَكمَلتُ لَكُم دينَكُم وَأَتمَمتُ عَلَيكُم نِعمَتى وَرَضيتُ لَكُمُ الإِسلٰمَ دينًا

आज मैने तुम्हारे दीन को तुम्हारे लिए पूर्ण कर दिया है। और तुम पर अपना एहसान पूरा कर दिया है। और मैंने तुम्हारे लिए इस्लाम के दीन को पसन्द किया है।

क़ुरआन 5:3 (एक हिस्सा)

यह इंसानियत के लिए अल्लाह का आख़िरी पैग़ाम है — अल्लाह के सब नबियों के लाए हुए पैग़ामों को पाक करके एक पैग़ाम में समेटने का वक़्त आ गया है: सिर्फ़ अल्लाह की इताअत।

📖क़ुरआन पढ़ेंक़ुरआन