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क्या क़ुरआन काफ़ी है?

क़ुरआन अपने बारे में क्या कहता है, इस पर एक शांत नज़र। पढ़िए, फिर ख़ुद फ़ैसला कीजिए।

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सवाल

बहुत से लोग पूछते हैं: “क्या सिर्फ़ क़ुरआन मेरी रहनुमाई के लिए काफ़ी है?” सबसे अच्छा तरीक़ा है, क़ुरआन से ही पूछना।

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क़ुरआन अपने बारे में क्या कहता है

क़ुरआन ख़ुद को कहता है...आयत
पूरी तरह खोलकर बयान की हुई6:114
मुकम्मल6:115
हर चीज़ की तफ़सील देने वाली12:111
हर चीज़ को खोलकर बताने वाली, हिदायत और रहमत16:89
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आयतें

“क्या मैं अल्लाह के (क़ानून के) सिवा किसी और को फ़ैसला करने वाला बनाऊँ, जबकि उसने तुम पर यह किताब पूरी तरह से खोलकर उतारी है? और जिन लोगों को हमने किताब दी है वे जानते हैं कि यह तुम्हारे रब की तरफ़ से सच्चाई के साथ उतारी गई है। सो तुम सन्देह करने वालों में से न बनो।”

क़ुरआन 6:114

“और तुम्हारे रब की बात सच और इंसाफ़ के साथ पूरी हो गई। उसकी बातों को कोई बदल नहीं सकता। और वह सब कुछ सुनता और जानता है।”

क़ुरआन 6:115

لَقَد كانَ فى قَصَصِهِم عِبرَةٌ لِأُولِى الأَلبٰبِ ما كانَ حَديثًا يُفتَرىٰ وَلٰكِن تَصديقَ الَّذى بَينَ يَدَيهِ وَتَفصيلَ كُلِّ شَىءٍ وَهُدًى وَرَحمَةً لِقَومٍ يُؤمِنونَ

इस आयत का हिन्दी अनुवाद तैयार हो रहा है। ऑनलाइन क़ुरआन में दूसरी ज़बानों में पढ़ सकते हैं।

क़ुरआन 12:111

وَيَومَ نَبعَثُ فى كُلِّ أُمَّةٍ شَهيدًا عَلَيهِم مِن أَنفُسِهِم وَجِئنا بِكَ شَهيدًا عَلىٰ هٰؤُلاءِ وَنَزَّلنا عَلَيكَ الكِتٰبَ تِبيٰنًا لِكُلِّ شَىءٍ وَهُدًى وَرَحمَةً وَبُشرىٰ لِلمُسلِمينَ

इस आयत का हिन्दी अनुवाद तैयार हो रहा है। ऑनलाइन क़ुरआन में दूसरी ज़बानों में पढ़ सकते हैं।

क़ुरआन 16:89
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क़ुरआन का एक और सवाल

تِلكَ ءايٰتُ اللَّهِ نَتلوها عَلَيكَ بِالحَقِّ فَبِأَىِّ حَديثٍ بَعدَ اللَّهِ وَءايٰتِهِ يُؤمِنونَ

इस आयत का हिन्दी अनुवाद तैयार हो रहा है। ऑनलाइन क़ुरआन में दूसरी ज़बानों में पढ़ सकते हैं।

क़ुरआन 45:6
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यह पेज क्या नहीं कह रहा

  • यह नहीं कहता कि कोई बुरा इंसान है।
  • यह आपसे अपना परिवार या दोस्त छोड़ने को नहीं कहता।
  • यह सिर्फ़ इतना कहता है कि खुले दिमाग़ से क़ुरआन को ख़ुद जाँचिए। “सो तुम सन्देह करने वालों में से न बनो” (6:114) किताब को क़रीब से देखने की अल्लाह की अपनी दावत है।
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ख़ुद जाँचिए

  1. ऑनलाइन क़ुरआन अपनी ज़बान में पढ़िए।
  2. गणित का करिश्मा देखिए। यह इस बात की निशानी है कि यह किताब महफ़ूज़ है।
  3. अल्लाह से हिदायत माँगिए। वही सबसे अच्छा रहनुमा है।
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